*प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेंद्र मोदी जी को 77वें जन्मदिन पर संस्कृति सेवा दिवस के रूप में मनाया गया* *गोविंदपुरी, कालकाजी में यमुना परिवार काउंसिल ने 77 किलो लड्डू प्रसाद का किया वितरण, बच्चों और युवाओं को सनातन संस्कार, पर्यावरण एवं यमुना संरक्षण से जोड़ने का लिया संकल्प*
*प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेंद्र मोदी जी को 77वें जन्मदिन पर संस्कृति सेवा दिवस के रूप में मनाया गया*
*गोविंदपुरी, कालकाजी में यमुना परिवार काउंसिल ने 77 किलो लड्डू प्रसाद का किया वितरण, बच्चों और युवाओं को सनातन संस्कार, पर्यावरण एवं यमुना संरक्षण से जोड़ने का लिया संकल्प*
*नई दिल्ली, 17 सितंबर, 2026। यमुना परिवार काउंसिल के निदेशक श्री कपिल गर्ग जी के नेतृत्व में यमुना परिवार काउंसिल द्वारा भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी के 77वें जन्मोत्सव के अवसर पर गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को श्री दुर्गा माता मंदिर, गुरु रविदास मार्ग, गोविंदपुरी, कालकाजी, दक्षिण दिल्ली में संस्कृति सेवा दिवस के रूप में सामूहिक मिलन एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दीर्घ सार्वजनिक सेवा संकल्पों, राष्ट्र एवं समाज के प्रति सेवा भावना, सनातन संस्कृति एवं भारतीय जीवन-मूल्यों के संरक्षण तथा पर्यावरण और माँ यमुना जी की स्वच्छता, निर्मलता एवं संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।* इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार, प्रकृति एवं माँ यमुना जी के संरक्षण से जोड़ने तथा समाज में सेवा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को निरंतर बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में 77 किलो का लड्डू तैयार किया गया, जिसे भोग अर्पित करने के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं एवं नागरिकों को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों, किशोरों एवं युवाओं को भारतीय संस्कृति, सनातन ज्ञान-परंपरा, संस्कार, पर्यावरण चेतना और माँ यमुना जी के संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल सनातन शिक्षा एवं संस्कार अभियान की शुरुआत का संकल्प लिया गया। इस अभियान का मूल भाव संस्कारित बालक, समर्थवान समाज और सशक्त राष्ट्र रखा गया है। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा, संस्कृति और जीवन-मूल्य हमारी राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं और नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
*वरिष्ठ पत्रकार एवं कार्यक्रम संयोजक श्री राजीव श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, अपितु यह जीवन को प्रकृति, समाज, परिवार, कर्तव्य और सेवा से जोड़ने वाली व्यापक ज्ञान-परंपरा है। उन्होंने बच्चों और युवाओं में संस्कार, भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।*
*यमुना महाआरती के संयोजक श्री मुकेश सोलंकी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए माँ यमुना जी के प्रति जन-जागरूकता और संरक्षण के लिए समाज की सहभागिता पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा माँ यमुना जी एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों को दिए जा रहे महत्व तथा उनके सेवा-संकल्पों का उल्लेख किया।* उन्होंने उपस्थित लोगों से प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस के अवसर पर आशीर्वाद का दीप जलाने का आह्वान किया तथा 77 किलो के लड्डू प्रसाद को कार्यक्रम के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के बीच वितरित करने की जानकारी दी।
*यमुना परिवार काउंसिल की यमुना महाआरती सह-संयोजक एवं कार्यक्रम सह-संयोजक श्रीमती कंचन गर्ग ने मंच का संचालन करते हुए उपस्थित अतिथियों एवं सभी नागरिकों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके सार्वजनिक जीवन के दीर्घ सेवा-संकल्प और राष्ट्रहित में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस को संस्कृति सेवा दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना को समाज के बीच मजबूत करना है। उन्होंने माँ यमुना जी और सनातन संस्कृति के प्रति समाज की जिम्मेदारी पर भी अपने विचार रखे।*
*श्री मुकेश सोलंकी ने यमुना परिवार काउंसिल द्वारा चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों की जानकारी देते हुए जेन-जी सहित युवा वर्ग को माँ यमुना जी के संरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आगामी यमुना गौरव पद यात्राओं के माध्यम से समाज में यमुना संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने आगामी 22 नवंबर 2026 को भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय माँ यमुना महोत्सव एवं महाआरती कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उपस्थित नागरिकों को सादर आमंत्रित किया।* उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में राष्ट्रीय बाल सनातन शिक्षा एवं संस्कार अभियान के अंतर्गत बच्चों और किशोरों को रामायण एवं महाभारत की प्रेरक कथाओं, वेद-उपनिषदों के मूल विचारों, संस्कृत, भारतीय पर्व-परंपराओं, सत्य, अहिंसा एवं सेवा जैसे जीवन-मूल्यों तथा महान संतों, महापुरुषों और वैज्ञानिकों के जीवन से परिचित कराने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। साथ ही उन्होंने मोदी जी के वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे सार्वभौमिक विचारों के माध्यम से बच्चों में भारतीय संस्कृति के साथ प्रकृति एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया। अभियान के अंतर्गत मंदिरों को बाल-संस्कार एवं ज्ञान केंद्रों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। इच्छुक मंदिरों में निर्धारित दिनों पर निःशुल्क बाल-संस्कार कक्षाएँ संचालित करने की परिकल्पना की गई है, जिसमें योग्य पुजारी, आचार्य, विद्वान एवं शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बच्चों की आयु के अनुसार बाल वर्ग, प्रारंभिक संस्कार वर्ग, किशोर वर्ग एवं युवा संवाद वर्ग के माध्यम से कहानी, संवाद, श्लोक, नाटक और विभिन्न गतिविधियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात कही गई। अभियान के प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भारत की पहचान, सनातन ज्ञान-परंपरा, राम-कृष्ण से प्रेरणा, ऋषि-महापुरुष, संस्कार एवं जीवन-मूल्य, भारतीय इतिहास, प्रकृति-दृष्टि तथा राष्ट्र एवं नागरिक कर्तव्य जैसे प्रमुख विषयों को शामिल करने पर विचार किया गया। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों के जरिए ई-पुस्तकों, वीडियो और ऑडियो श्लोकों के माध्यम से बच्चों को घर पर भी सीखने का अवसर उपलब्ध कराने की योजना पर चर्चा हुई।
यमुना परिवार काउंसिल द्वारा इस अभियान को प्रारंभिक स्तर पर दिल्ली के चुनिंदा मंदिरों में पायलट परियोजना के रूप में संचालित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अंतर्गत मंदिर चयन, शिक्षक-टीम का गठन, पाठ्य सामग्री तैयार करना, पंजीकरण, नियमित कक्षाएँ, अभिभावक संवाद और मूल्यांकन जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। सफलता के आधार पर इस पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की परिकल्पना की गई है, जिसका लक्ष्य एक मंदिर, एक बाल-संस्कार केंद्र की दिशा में कार्य करना है।
कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों से आह्वान किया गया कि मंदिर इस पहल के लिए स्थान उपलब्ध कराएँ, विद्वान एवं आचार्य अपना ज्ञान और समय दें, समाज आवश्यक संसाधनों में सहयोग करे तथा अभिभावक अपने बच्चों को संस्कार एवं ज्ञान की इन कक्षाओं से जोड़ें। साथ ही क्षेत्र के विद्वान पंडितों एवं आचार्यों से इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर विचार-विमर्श एवं सहयोग का आग्रह किया गया।
*कार्यक्रम के दौरान यमुना परिवार काउंसिल के निदेशक श्री कपिल गर्ग ने गुरुकुल से पधारे आचार्यों एवं शिष्यों का स्वागत करते हुए उन्हें विशेष रूप से 77 किलो के लड्डू प्रसाद का वितरण कराया। गुरुकुल से आए आचार्यों एवं शिष्यों के कर-कमलों से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रथम भोग अर्पित किया गया। श्री कपिल गर्ग ने कहा कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, सेवा और संस्कारों को समाज की नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि माँ यमुना जी हमारी आस्था, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी जीवनदायिनी नदी हैं, इसलिए यमुना जी की स्वच्छता, निर्मलता और संरक्षण के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों से सनातन संस्कारों के साथ पर्यावरण एवं माँ यमुना जी के संरक्षण के कार्यों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।*
कार्यक्रम का समापन माँ यमुना जी, सनातन संस्कृति और राष्ट्र के प्रति सेवा एवं संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वस्थ, दीर्घ एवं सफल जीवन की मंगलकामना की। यमुना परिवार काउंसिल का संदेश है कि ज्ञान से संस्कार, संस्कार से चरित्र और चरित्र से राष्ट्र का निर्माण होता है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाकर ही एक संस्कारित, समर्थ और सशक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।


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